उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी पुलिस एन्काउंटर के जरिए 12 लोगों को लूट के मामले में झूठा फंसाए जाने के 35 साल बाद 12 सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गयी है। CB-CID की जांच में इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को मनगढ़ंत पाया गया था।
CB-CID के इंस्पेक्टर सुशील कुमार की शिकायत पर महाराजपुर थाने में FIR दर्ज की गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि मामला साक्ष्य गढ़ने, झूठे आरोप लगाने, अवैध रूप से हिरासत में रखने और मारपीट करने के आरोपों से संबंधित है।
कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 194, 195, 182, 211, 218, 220, 323 और 342 के तहत दर्ज की गयी है। मामले की जांच CB-CID करेगी।
FIR के अनुसार, 22 अगस्त 1991 को पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि हथियारों से लैस कुछ लोग जीटी रोड पर नरवल मोड़ के पास वाहनों को लूटने की योजना बना रहे हैं।
पुलिस ने दावा किया था कि 23 अगस्त की रात करीब 12:30 बजे संदिग्धों ने बबूल की डालियां डालकर सड़क अवरुद्ध कर दी थी, जिसके बाद पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई। इस दौरान राकेश पाठक समेत 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के पास से आग्नेयास्त्र और विस्फोटक बरामद किए गए थे।
बाद में CB-CID की जांच में सामने आया कि घटना के संबंध में पुलिस की ओर से पेश की गई कहानी मनगढ़ंत थी।
डीसीएम वाहन के चालक उमाशंकर पासी और क्लीनर विजेंद्र सिंह ने CB-CID के जांचकर्ताओं को बताया कि पुलिसकर्मियों ने उन लोगों को उठाया था और उनके वाहन में बैठाकर महाराजपुर थाने ले गए थे।
उन्होंने इस बात से इन्कार किया कि घटनास्थल पर लूट की कोई कोशिश हुई थी या पुलिस के साथ कोई मुठभेड़ हुई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पकड़े गए लोगों के साथ मारपीट की गई थी और हथियारों की बरामदगी की कहानी भी गढ़ी गई थी।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि जांच में तत्कालीन थाना प्रभारी विद्यासागर त्रिपाठी और जांच अधिकारी रमेश चंद्र भटोले समेत 18 पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे। इनमें से छह पुलिसकर्मियों की अब तक मौत हो चुकी है।
यह मामला राकेश पाठक के बड़े भाई देव प्रसाद पाठक की शिकायत से शुरू हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया था कि तत्कालीन थाना प्रभारी विद्यासागर त्रिपाठी ने उनके परिवार से बिना कोई भुगतान किए 400 वर्ग गज का प्लॉट मांगा था।
देव प्रसाद ने पत्रकारों को बताया कि प्लॉट देने से इन्कार करने पर थाना प्रभारी ने उनके भाई और उसके साथियों को लूट के मामले में फंसा दिया। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट से अपने भाई की जमानत कराने के बाद उन्होंने मामले की CB-CID जांच की मांग की थी।
एक अधिकारी के अनुसार, CB-CID मुख्यालय, लखनऊ ने 25 सितंबर 1995 को जांच रिपोर्ट को मंजूरी दी थी।
राकेश पाठक के भाई ने बताया कि 8 मई 2003 को कानपुर में एक सड़क दुर्घटना में राकेश की मौत हो गई थी।
FIR में जिन पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं। उनमें उपनिरीक्षक बीडी सारस्वत, योगेंद्र नाथ सिंह और रमेश चंद्र, हेड कांस्टेबल हृदय नारायण तिवारी, कांस्टेबल तेज नारायण तिवारी, बैजनाथ, बृजेश कुमार, चंद्रबली, विद्याकांत शुक्ला, राम आसरे और रमेश कुमार तिवारी तथा चालक जगेश्वर प्रसाद शामिल हैं।
